जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
बस मुझी को देखते रहते हो और ख्यालों मै मेरे खोये रहते हो |
जब तुम देकते हो मुझे पता नहीं दील को क्या हो जाता है |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
कभी न इतना जोर से धड़का हो तुम्हारे देखने भर से धड़क जाता है |
दिल मैं मेरे बोहत सारी बातें है जो तुमसे कहना है |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
पर तुम्हे सामने पा कर जेसे दिल को सुब कुछ भूल जाना है |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
आज हिमत जुट्टा कर अपने सब्दों को समेत रही हूँ |
तुमसे बोहत प्यार करती हूँ यह दिल से कह रही हूँ |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
न कोइ कीमती तोफ्फा न कोइ फूल है मेरे पास |
बस साथ दूंगी हमेसा तुम्हारा यह वादा भर है मेरे पास |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
सिन्धु सुता पत्रों
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
बस मुझी को देखते रहते हो और ख्यालों मै मेरे खोये रहते हो |
जब तुम देकते हो मुझे पता नहीं दील को क्या हो जाता है |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
कभी न इतना जोर से धड़का हो तुम्हारे देखने भर से धड़क जाता है |
दिल मैं मेरे बोहत सारी बातें है जो तुमसे कहना है |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
पर तुम्हे सामने पा कर जेसे दिल को सुब कुछ भूल जाना है |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
आज हिमत जुट्टा कर अपने सब्दों को समेत रही हूँ |
तुमसे बोहत प्यार करती हूँ यह दिल से कह रही हूँ |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
न कोइ कीमती तोफ्फा न कोइ फूल है मेरे पास |
बस साथ दूंगी हमेसा तुम्हारा यह वादा भर है मेरे पास |
जब भी मिलते हो क्यूँ आँखों से बोलते हो ?
एक मुशकुराहट मैं कितनी बातें कह जाते हो |
सिन्धु सुता पत्रों
No comments:
Post a Comment